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रविवार, 4 अगस्त 2013

मुक्तक - कब तक रहोगी दूर












कब तक रहोगी दूर, श्यामल मेघ की तरह
बस चमकती, लरजती, मनोद्वेग की तरह
इक दिन तो आओ सावन की झड़ी साथ ले
फिर बरसो मेरे मन, अदम्य मेह की तरह !

*अदम्य - बेरोक, बेकाबू

~ अशोक सिंह  Aug. 04, 2013

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