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रविवार, 14 नवंबर 2010

सब-कुछ कुछ बदला सा है !

समय के फेर में क्या कुछ नहीं बदलता है, वियोग मे बदलाव कुछ ज्यादा ही मन कॊ चुभते हैं । ऐसे में अगर वो मिल जायें जिनसे सारे गिले-शिकवे किये जा सकें तो, जैसे आग मे घी काम करती है वैसे ही मन के गुबार निकलने शुरू हो जाते हैं.....!

कितने अरसे बाद मिले हो,
मन से बाहर तुम निकले हो
कितने सावन, पतझर, मौसम, सब बेमानी बीता सा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

मैं ऊपर से इंसान वही,
चेहरा वो, मुस्कान वही,
पर अंतर्मन की दबी कूक में, दर्द तुम्हारे जैसा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

रात्रि प्रहर की बात न छेड़ो
या दिन की सौगात न छेड़ो
रातों क्या अब दिन में भी, जीना मुश्किल सा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

भरी दोपहर श्राप बन गयी
दिनचर्या संताप बन गयी
सुबह शाम की उलझन में सब, कुछ उलझा सा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

माया मोह छोड़ न पाया
तुमसे भी मुख मोड़ न पाया
मरते जीते सोते जगते, देखा इक सपना सा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

जीया फिर मैं किस उमंग में
कटता जीवन किस तरंग में
अपने में कुछ ढूंढ़ सका न, जो भी चाहा तुम सा है!
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

बदला अंदर का इंसान,
तुमसे थी जिसकी पहचान,
जो तुमने देखा जाना, क्या अब भी वो वैसा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है ?

मौसम बदले इससे पहले,
कदम डगमगे इससे पहले,
सम्हला गिर कर पहले पर, अब उठना मुश्किल सा है !
सब-कुछ कुछ बदला सा है !

मंगलवार, 9 नवंबर 2010

मान भी जाओ, जाने भी दो !

मान भी जाओ, जाने भी दो !

कब जाने फ़िर ये वक्त लौट कर आयेगा,
कब जाने फिर मनुहार कौन करवायेगा,
पल बीत न जाये इसका ही है डर मुझको,
कल क्या जाने दिन कौन अजूबा लायेगा !

मन जो आता, आने भी दो !
पर, मान भी जाओ, जाने भी दो !

दिन आते जाते, लाते यादों की झांकी,
तुम रहे कभी या मै ही भटका एकाकी,
अब बदली से है चांद निकलने को आया
कह दो मन की, कुछ रह जाये न बाकी !

मन चंचल है, भरमाने भी दो !
यूं, मान भी जाओ, जाने भी दो !

इनकी उनकी बातें सुनने मे है क्या रस,
निर्लिप्त भाव से लेती है दुनिया सब रस,
जो खोया पाया, हार जीत वो अपनी थी,
न्योछावर हो, अपना भी लो तुम मुझको बस !

गीत प्रणय का, गाने भी दो !
और, मान भी जाओ, जाने भी दो !

तुमने सदैव मुझसे मांगी छोटी खुशियां,
दे न सका चाही मैने जो सुख लणियां,
पर आज समय का उग्र चक्र झकझोर रहा,
जुड़ जाने दो हम दोनो की सतरंगी कड़ियां !

मीत मिले, मन तन मिल जाने भी दो !
अब, मान भी जाओ, जाने भी दो !