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सोमवार, 19 दिसंबर 2011

राह अभी भी तकना होगा !

स्वर्णिम सूरज गगन चढ़ चुका,
दिन का रास्ता और बढ़ चुका,
कल का कल से, और आज से यूं ही नाता रखना होगा ।
राह अभी भी तकना होगा !

दिन आते जाते, सृष्टि की माया
सुख कुछ, कुछ लाये दुख की छाया
सभी दिवस पर प्रश्न-चिन्ह है, सही दिवस कब चुनना होगा ।
राह अभी भी तकना होगा !

मौसम आए, आएंगे अविरलता से
समय चक्र गतिमान, अविरतता से
कितने मौसम की साझी, इस क्षणिक दूत से करना होगा ।
राह अभी भी तकना होगा !

क्या एक जन्म ही काफी है, पूछे मन
या एक सांस मे जी डालें सारे जीवन
तन का मन से, मन का मन से जीवन परिचय करना होगा
राह अभी भी तकना होगा !

मेरी कब मुझसे ही होगी पहचान
कितने बरस, परंतु मैं खुद से अंजान
सदियों की इस ऊहापोह में, खुद को कब तक तकना होगा ।
राह अभी भी तकना होगा !

ऐसा भी दिन आए जब मैं बुद्ध बनूँ
निर्बलता के बाने से हट, शुद्ध बनूँ
सदियों मे यदि एक बुद्ध तो, कितनी सदी ठहरना होगा ?
राह अभी भी तकना होगा !

~ अशोक सिंह  
   न्यू यॉर्क 

3 टिप्‍पणियां:

Archana ने कहा…

बहुत अच्छे से लिखा है ...

kshama ने कहा…

Achhee rachana hai..."Rah" shabd mere wicharse stree ling hai.

Ashok Singh ने कहा…

Archana ji, dhanyawad.
Kshama ji, raah, maarg, rasta, path...stree ling to nahi lagte. Aur vichar aur shodh kar ke bataiye.