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शनिवार, 30 नवंबर 2013
बुधवार, 2 अक्टूबर 2013
बुधवार, 18 सितंबर 2013
मुक्तक - वो लोग थे किस्मत वाले
वो लोग थे किस्मत वाले जो आँचल की छांव छांव चले
यूं समझौते हर मोड़ किए, पर साथ में ले कर गाँव चले
पकड़ा हमने भी दामन पर कुछ अकड़ रही मशरूफ़ रहे
गुज़री इनके-उनके दरम्याँ, कोई ठौर मिले न ठाँव मिले।
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, सितंबर 14, 2013
यूं समझौते हर मोड़ किए, पर साथ में ले कर गाँव चले
पकड़ा हमने भी दामन पर कुछ अकड़ रही मशरूफ़ रहे
गुज़री इनके-उनके दरम्याँ, कोई ठौर मिले न ठाँव मिले।
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, सितंबर 14, 2013
मुक्तक - बिछड़े जो मिल कर तुझसे
बिछड़े जो मिल कर तुझसे, 'मुकद्दर' की बात थी
फिर दर्द-ए-दिल का सिलसिला, तेरी-ही सौगात थी
अब दर्द, शिकवे इंतज़ार का जिक्र भी क्यूँ-कर करें,
जब शुरू तुझसे खत्म तुझसे तुझसे ही सब बात थी
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, सितंबर 14, 2013
फिर दर्द-ए-दिल का सिलसिला, तेरी-ही सौगात थी
अब दर्द, शिकवे इंतज़ार का जिक्र भी क्यूँ-कर करें,
जब शुरू तुझसे खत्म तुझसे तुझसे ही सब बात थी
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, सितंबर 14, 2013
रविवार, 8 सितंबर 2013
रविवार, 4 अगस्त 2013
मुक्तक - क्यों लज्जित केदार नाथ?
2013, उत्तराखंड के पहाड़ों पर आई प्रलय पर एक प्रलाप;
प्रकृति के प्रकोप से क्यों त्रसित देवभूमि, नाथ
प्रकृति के प्रकोप से क्यों त्रसित देवभूमि, नाथ
हिल उठे विराट-हृदय, ऐसा क्यों सर्व नाश ?
पर्वतों का शीश सदा उठता नभ-नील ओर
कैसा ये सावन, क्यों लज्जित केदार नाथ ?
prakriti ke prakop se kyon trasit devbhoomi, nath
hil uthe virat hriday, aisa kyon sarv nash?
parvato.n ka sheesh sada uthata nabh neel ore
kaisa ye sawan, koy.n lajjit Kedar-Nath?
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, 2013
मुक्तक - जहाँ जहां जन्म है,
जहाँ जहां जन्म है, मृत्यु है, उपास है
आदि है तो अंत है ध्वंस है विनाश है
'प्रार्थना' कि आजन्म मान मर्यादा रहे
इक जीवंत जीवन की सर्वस्व आस है
~ अशोक सिंह
आदि है तो अंत है ध्वंस है विनाश है
'प्रार्थना' कि आजन्म मान मर्यादा रहे
इक जीवंत जीवन की सर्वस्व आस है
~ अशोक सिंह
शनिवार, 6 अप्रैल 2013
आज़ाद शेर
~*~*~*~*~*~
गुलाबो, मैखाने के जाम मेरे किसी काम के नहीं
तुम्हारी मदभरी आँखों से मन शराबी हो जाता है
~*~*~*~*~*~
बदल गए हैं हम भी वक़्त के साथ-साथ
अब हम भी चुन चुन के बदला लेते हैं
जब वो चूमते हैं हमारे प्यासे होठों को
हम उनकी रूह तक भी चूम लेते हैं
~*~*~*~*~*~
आते आते आप की, आहट रुक जो जाती है
आप को खेल लगता है हमारी जान जाती है
aate aate aap ki aahat ruk jo jaati jai
aap ko khel lagta hai, hamari jaan jaati hai
~*~*~*~*~*~
इन खुश्क आँखों की वीरानगी पर न जा,
हर एक बात चेहरे से ज़ाहिर नहीं होती ।
~*~*~*~*~*~
सहर फैला रही है अपने
बाजू,
मेरा साया सिमटता जाता
है!
कैसे जीऊँ, मर मर के हज़ार
बार
अब तो दम सा निकलता
जाता है !
~*~*~*~*~*~अगर किस्मत से दिख जाये, नज़ाकत की झपक देखो,
मोहब्बत हर गुलिस्तां में, कि पल दो पल झलक देखो,
इब्तिदा और इश्क में कम हो रहा अब फ़ासला,
हंसी लम्हे जो मिल जायें, जियो आखिर तलक, देखो ।
~*~*~*~*~*~
तार्रुफ का उनसे इत्तेफाक़ हुआ है ज़रूर
ये और बात है कि उन्हें याद भी नहीं ।
~*~*~*~*~*~
किस्तों में मिले यार-दोस्त, प्यार औ रहबर
चलते जो सारी उम्र हम-सफर नहीं मिले ।
~*~*~*~*~*~
कहने को इस कायनात में क्या कुछ नहीं है
पर देखने को रहता है क्या, तुझे देखने के बाद
~*~*~*~*~*~
ठोकर मे है वो दौलत, पैरों तले
वो मान
रंजिश करे जो तेरे, और मेरे दरमियान
!
~*~*~*~*~*~
प्रेम की गाथा रही
अब तक की सारी शायरी
भर गयी जाने न कितने
शायरों की डायरी
व्यास के दो शब्द हैं
इक प्रेम करने वाले को
हो भला या बुरा लिखा, बात कहते हैं
खरी ।
~*~*~*~*~*~
इस कदर जलवा फरेब हैं कि,
आईने से भी शरमा रहे है वो ।
~*~*~*~*~*~
~*~*~*~*~*~
कुछ तुम भी चलो, कुछ हम भी चलें
साथ चलने का दौर, यूं ही चलता रहे
पास आओ न आओ मगर कुछ करो
खून दर्द-ए-जिगर से मेरे रिसता रहे ।
~*~*~*~*~*~
आज और कल हों, बस गुलाब की बातें
हमारे दरमियाँ बातें, बस प्यार की बातें
गर उतरे ख़ुशबूओं की तह तक हम-तुम
तो उम्र भर होती रहेंगी खुमार की बातें !
~*~*~*~*~*~
सजा जहन मे गाँव का पनघट, और सभी पहचाने मोड़
लेकिन जो यादें दुखदायी, भूल उन्हें चल पीछे छोड़ ।
~*~*~*~*~*~
दो शाम की रोटी मेरी ले, इन दीनों का भी पेट तू भर,
मैं भी बंदा तेरा, वो भी, तेरा ही common खाता है ।
~*~*~*~*~*~
७/१३/११ मुम्बई बम ब्लास्ट:
रोज़ी रोटी की चिंता में, मम्मी और पापा निकले थे
सपने कल के ले आँखों मे थे हिन्दू मुस्लिम ईसाई
क्या पता उन्हें, खूंखार दरिंदे मौत बांटने निकले थे ।
~*~*~*~*~*~
कत्ल करने के लिए हथियार का क्या काम है,
एक नज़र तो डालिए, हम यूं ही मर जाएँगे ।
~*~*~*~*~*~
नाच नहीं आये भय्या तो आँगन टेढ़ा कहते हैं ।
~*~*~*~*~*~
शब्दों का ही फेर है, प्रेम - पीर - सम्मान,
मोती हिय से पिरा तो, ३ लोक गुण-गान।
~*~*~*~*~*~
शनिवार, 9 फ़रवरी 2013
प्रेम के सतरंगी अज़ूबे
बंधनों से सजे दीवानगी के ये मंसूबे !
प्रेम के सतरंगी सात वर्षों में,
क्या पाया, और क्या नहीं पाया ।
सात समुंदरों का प्यार
हर सुबह, हर शाम
प्यार मे सराबोर,
रात के सपने संजोते
अलसाती सी भोर,
डूब जाने दो अपने आंचल मे
आज, कल और इस युग के समापन तक,
ठहर जाने दो ये पल
मेरे और तुम्हारे अंतर्मन तक ।
सपने तो सजे हैं
बीज भी बोये ही हैं
लहलहाने दो, इनको बेरोकटोक
सारे संसार मे
इनकी खुशियां बिखर जाने दो...!
रविवार, 20 जनवरी 2013
ताजमहल
ऐ ताजमहल, ताजमहल, ताजमहल........!
फकीरों का तसव्वुर औ' शाहे-जहाँ पहल
मोहब्बत म'अमूर या मिसाल, ताजमहल!
*तसव्वुर=सपना
एक हंसीं रूह के सीने पे तराशे संगमरमर
और सन्नाई की हर हद, ये रूहानी गजल
*सन्नाई—कारीगरी
इक तरफ शफ्फाक पत्थर, बला की नक्काशी
फिर सैकड़ों सद चंद सितम, खून भरे पल
*सद चंद=सौ बार
इक बुल-हवस शहँ-शाह का नापाइदार इश्क़
दुनिया ने कहा प्यार की निशानी ये अव्वल
*बुल-हवस=जिसे सच्चे प्रेम के बजाए केवल कामवासना या लालसा हो
*नापाइदार = अल्पकालिक, क्षणभंगुर
किसी अर्जुमंद के इश्क़-औ-शक्ले-जमील पर
या बेनामो-नुमूद तेजोमहल पर खड़ा महल
*म'अमूर=कैदी
*अर्जुमंद=मुमताज़ महल का असली नाम
*शक्ले-जमील—सुंदर रूप;
*बेनामो-नुमूद=गुमनाम
*तेजोमहल=(A theory) राजपूत राजाओ द्वारा बनवाया तेजोमहल मंदिर, जिसे शाहजहाँ ने कब्ज़ा कर और हेर-फेर कर के ताजमहल का नाम दे दिया
ऐ ताजमहल, ताजमहल, ताजमहल........!
ae tajmahal, tajmahal, tajmahal..!
chaNd fakiroN ka tasavvur aur shahe-jahaaN
neem jiska hei meri jaanejaaN tajmahal
ek hanseeN rooh ke seene pe tarashe sangmarmar
aur sannaii ki ha'r ha'd, ye ruhanee gazal
ik taraf shaffaq patthar, balaa ki naqqashi
phir saikadoN sa'd chaNd sitam, khoon bhare pa'l
ik bul-hawas shahN-shah ka napaIkdar ishq
dunia ne kaha pyar ki nishani ye avval
kisi arjumaNd ke ishq-au-shakl-e-jameel par
ya benamo-numood tejo-mahal par khada mahal
*arjumand - mumtaj mahal ka asli naam
tejo-mahal=ek theory, jisme shahjehan ne rajputoN ke mandir TEJOMAHAL par kabza kar ke use Tajmahal me tabdeel kar diya tha
ae tajmahal, tajmahal, tajmahal..!
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, 19 जनवरी, 2013
फकीरों का तसव्वुर औ' शाहे-जहाँ पहल
मोहब्बत म'अमूर या मिसाल, ताजमहल!
*तसव्वुर=सपना
एक हंसीं रूह के सीने पे तराशे संगमरमर
और सन्नाई की हर हद, ये रूहानी गजल
*सन्नाई—कारीगरी
इक तरफ शफ्फाक पत्थर, बला की नक्काशी
फिर सैकड़ों सद चंद सितम, खून भरे पल
*सद चंद=सौ बार
इक बुल-हवस शहँ-शाह का नापाइदार इश्क़
दुनिया ने कहा प्यार की निशानी ये अव्वल
*बुल-हवस=जिसे सच्चे प्रेम के बजाए केवल कामवासना या लालसा हो
*नापाइदार = अल्पकालिक, क्षणभंगुर
किसी अर्जुमंद के इश्क़-औ-शक्ले-जमील पर
या बेनामो-नुमूद तेजोमहल पर खड़ा महल
*म'अमूर=कैदी
*अर्जुमंद=मुमताज़ महल का असली नाम
*शक्ले-जमील—सुंदर रूप;
*बेनामो-नुमूद=गुमनाम
*तेजोमहल=(A theory) राजपूत राजाओ द्वारा बनवाया तेजोमहल मंदिर, जिसे शाहजहाँ ने कब्ज़ा कर और हेर-फेर कर के ताजमहल का नाम दे दिया
ऐ ताजमहल, ताजमहल, ताजमहल........!
ae tajmahal, tajmahal, tajmahal..!
chaNd fakiroN ka tasavvur aur shahe-jahaaN
neem jiska hei meri jaanejaaN tajmahal
ek hanseeN rooh ke seene pe tarashe sangmarmar
aur sannaii ki ha'r ha'd, ye ruhanee gazal
ik taraf shaffaq patthar, balaa ki naqqashi
phir saikadoN sa'd chaNd sitam, khoon bhare pa'l
ik bul-hawas shahN-shah ka napaIkdar ishq
dunia ne kaha pyar ki nishani ye avval
kisi arjumaNd ke ishq-au-shakl-e-jameel par
ya benamo-numood tejo-mahal par khada mahal
*arjumand - mumtaj mahal ka asli naam
tejo-mahal=ek theory, jisme shahjehan ne rajputoN ke mandir TEJOMAHAL par kabza kar ke use Tajmahal me tabdeel kar diya tha
ae tajmahal, tajmahal, tajmahal..!
~ अशोक सिंह
न्यू यॉर्क, 19 जनवरी, 2013
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